धर्म स्थापना बीज-रक्षा

दुनिया की सबसे महान शिक्षा

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प्रेरणा

आध्यात्मिक काम विज्ञान की जानकारी हमें सर्वसाधारण तक पहुंचानी ही चाहिए. सृष्टि के इतने महत्वपूर्ण विषय को जिसकी जानकारी प्रकृति जीव‑जन्तुओं तक को करा देती है, उसे गोपनीय नहीं रखा जाना चाहिए. खासतौर से तब जबकि इस महत्वपूर्ण विज्ञान का स्वरूप लगभग पूरी तरह से विकृत और उलटा हो गया हो. जो मान्यतायें चल रही हैं, वे ही चलने दी जायें, सुलझे हुए समाधान और सुरुचिपूर्ण प्रावधान यदि प्रस्तुत न किए गये तो विकृतियाँ ही बढ़ती, पनपती चली जायेंगी और उससे मानव जाति एक महती शक्ति का दुरुपयोग करके अपना सर्वनाश ही करती रहेगी. समय आ गया कि काम-विद्या के तत्व-ज्ञान का संयत और विज्ञान सम्मत प्रतिपादन करने का साहस किया जाये और संकोच का यह पर्दा उठा दिया जाये कि इस महान विद्या की विवेचना हर स्तर पर अश्लील ही मानी जायेगी, उसे हर स्थिति में गोपनीय ही रखा जाना चाहिए. यह संकोच मानव-जाति को एक महान लाभ से वंचित ही रखे रहेगा.

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य – सावित्री कुण्डलिनी एवं तंत्र - AWGP

मनुष्य की दो महान शक्तियां

बीज और बुद्धि, ये दो महान शक्तियों के साथ मनुष्य स्वयं ईश्वर ही है. बुद्धि जो भी विचार करे, बीज उसे वास्तविकता में रूपांतरित करता है.

मनुष्य जीवन का मूल आधार

वृक्ष की जड़ की भांति मनुष्य का मूलाधार बीज ही, प्राण ऊर्जा के द्वारा, जीवन में सफलता के जरूरी संसाधन प्रकृति नेटवर्क से आकर्षित करता है.

मनुष्य जीवन के दो रास्ते

‘मरणं बिंदु पातेन, जीवनं बिंदु धारणात्.’ अर्थात बीज-क्षरण असफलता रूपी मृत्यु है और बीज-रक्षा सफलता रूपी जीवन है.

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